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Himalayan Yoga Glow — हिमालय की शुद्ध परंपरा, विश्व-स्तरीय स्किनकेयर विज्ञान।

Leafoberryy ने भारत के ब्यूटी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाते हुए पेश किया है भारत का पहला Himalayan Yoga Glow, एक ऐसाअनोखा फ़ॉर्म्यूलेशन, जो हिमालयी पर्वतों की प्राचीन सौंदर्य परंपराओं को आधुनिक स्किनकेयर साइंस की सटीकता के साथ जोड़ता है।

इस क्रांतिकारी निर्माण के केंद्र में हैं गज़ल कोठारी, Leafoberryy की फ़ाउंडर, सर्टिफाइड फ़ॉर्म्युलेटर और दूरदर्शी इनोवेटर। परंपरा और तकनीक केसुंदर मेल के लिए जानी जाने वाली गज़ल ने वर्षों तक वैश्विक ब्यूटी रिचुअल्स, पर्वतीय वनस्पतियों और योग व मेडिटेशन से प्रेरित स्किन-सूथिंगथेरेपीज़ का अध्ययन किया है। उनका उद्देश्य सरल परंतु क्रांतिकारी था, ऐसी स्किनकेयर बनाना जो हिमालय की शांति और माइंडफुल लिविंग कीचमक को रोज़मर्रा की भारतीय त्वचा तक पहुंचाए।

Himalayan Yoga Glow को वास्तव में पाथ-ब्रेकिंग बनाता है उसका इनग्रीडिएंट हेरिटेज। Leafoberryy तिब्बत से दुर्लभ बॉटैनिकल कंसंट्रेट्सप्राप्त करता है Read more...

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FOFO (फोफो) क्या है? स्वास्थ्य जाँच से दूर रखने वाला यह डर क्यों है खतरनाक? आप भी जानें

मुंबई, 28 नवंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) आपने FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) के बारे में सुना होगा, लेकिन अब एक और मनोवैज्ञानिक बाधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेज़ी से ध्यान आकर्षित कर रही है: FOFO यानी Fear of Finding Out (पता चलने का डर)। यह डर लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य जाँच और स्क्रीनिंग से दूर रखता है, जिससे उनके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।

FOFO क्या है?
  • परिभाषा: FOFO एक ऐसी भावना है जहाँ कोई व्यक्ति चिकित्सा परीक्षणों या चेक-अप से डरता है क्योंकि उन्हें अपनी सेहत के बारे में कोई बुरी खबर पता चलने का डर होता है।
  • मनोवैज्ञानिक कारण: मनोचिकित्सकों के अनुसार, FOFO अक्सर चिंता (anxiety) और नियंत्रण की इच्छा से जुड़ा होता है। अनिश्चितता (uncertainty) से बचने के लिए, व्यक्ति अस्थायी रूप से चिंता को शांत करने हेतु जाँच को टालता रहता है।
  • आम व्यवहार: जिन लोगों को FOFO होता Read more...

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बेहतर फोकस के लिए सुबह 6:30 से 8 बजे या 9 से 11 बजे? जानिए कॉफी पीने का सही समय ☕

मुंबई, 27 नवंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) क्या आपकी सुबह की कॉफी का समय वाकई आपके काम पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है? विशेषज्ञ बताते हैं कि कैफीन का अधिकतम लाभ लेने के लिए इसे सही समय पर लेना बेहद जरूरी है, जो आपके शरीर की प्राकृतिक घड़ी (Biological Clock) से जुड़ा हुआ है।

डॉ. अनिकेत मुले, सलाहकार (आंतरिक चिकित्सा), केआईएमएस हॉस्पिटल्स, ठाणे के अनुसार, हमारा शरीर एक प्राकृतिक लय, जिसे सर्केडियन साइकिल (Circadian Cycle) कहते हैं, का पालन करता है। यह लय ही हमारी सतर्कता (Alertness) को नियंत्रित करती है, और इसी के आधार पर कॉफी पीने का सही समय तय होता है।

जागने के तुरंत बाद कॉफी क्यों नहीं?

डॉक्टर मुले बताते हैं कि जागने के तुरंत बाद आपके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर स्वाभाविक रूप से उच्च होता है। कोर्टिसोल वह हार्मोन है जो ऊर्जा और फोकस को बढ़ाता है।
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कोआला का अनोखा 'ब्रेकअप प्लान': अस्वीकृति मिलने पर गुस्सा नहीं, बल्कि तुरंत सो जाते हैं! 🐨💤

मुंबई, 26 नवंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) प्यार में अस्वीकृति (rejection) मिलने पर इंसान उदास होते हैं, गुस्सा करते हैं या अकेलेपन में खो जाते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई जानवर कोआला (Koalas) का तरीका बिल्कुल अलग और वैज्ञानिक है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, जब संभोग के मौसम (mating season) के दौरान नर कोआला को मादा द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वे उदास होने या लड़ने के बजाय तुरंत सोने चले जाते हैं।

ऊर्जा संरक्षण है मुख्य कारण

यह व्यवहार हास्यास्पद लग सकता है, लेकिन यह कोआला की जीवनशैली और उनके ऊर्जा संरक्षण (energy conservation) के कठोर नियम से जुड़ा हुआ है।

पोषण की कमी वाला आहार: कोआला का आहार लगभग पूरी तरह से यूकेलिप्टस के पत्तों पर निर्भर करता है, जिनमें पोषक तत्व (nutrients) बहुत कम होते हैं और वे रेशेदार विषाक्त यौगिकों (fibrous toxins) से भरपूर होते हैं।

धीमा चयापचय (Slow Metabolism): इस मुश् Read more...

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141 साल तक जीने वाली कछुए की मौत, आप भी जानिए इस असाधारण लंबी उम्र का राज

मुंबई, 28 नवंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) दुनिया के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले जीवों में से एक, गैलापागोस कछुए 'ग्रैम्मा' का 141 साल की उम्र में निधन हो गया है। अमेरिका के सैन डिएगो चिड़ियाघर (San Diego Zoo) की सबसे उम्रदराज़ निवासी ग्रैम्मा ने 20 नवंबर को अंतिम साँस ली।

दो विश्व युद्धों की साक्षी
  • उम्र: ग्रैम्मा की अनुमानित उम्र 141 साल थी। इस दौरान उसने दो विश्व युद्ध और लगभग 20 अमेरिकी राष्ट्रपतियों का शासन देखा।
  • चिड़ियाघर में आगमन: जू अधिकारियों के मुताबिक, ग्रैम्मा 1928 या 1931 के आसपास ब्रोंक्स जू से गैलापागोस कछुओं के पहले समूह के हिस्से के रूप में सैन डिएगो जू में आई थी।
  • 'जू की रानी': अपने प्यारे और शर्मीले व्यक्तित्व के कारण वह जू में आने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थी और उसके केयर स्पेशलिस्ट उसे प्यार से "जू की रानी" कहकर पुकारते थे।
  • निधन का कारण: जू की ओर से जारी बयान म Read more...

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