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बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव और जनमत संग्रह, कट्टरपंथ और सियासी अस्थिरता बनी बड़ी चुनौती

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के साथ-साथ जनमत संग्रह भी कराया जाएगा। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 29 दिसंबर 2025 तय की गई है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 30 दिसंबर से जनवरी के बीच होगी। इस चुनाव में देश की 300 संसदीय सीटों पर मतदान होगा। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है, जब 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से देश में मोहम्मद युनूस की अगुवाई में अंतरिम सरकार सत्ता संभाल रही है।

अंतरिम सरकार को सत्ता में आए लगभग डेढ़ साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश में हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। आए दिन हिंसा, आगजनी और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। देशभर में कट्टरपंथी ताकतें तेजी से अपनी जड़ें मजबूत कर रही हैं, जो न केवल सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा हैं, बल्कि आने वाले चुनावों की निष्पक्षता और शांति पर भी Read more...

इस्लामाबाद धमाका: डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के बाहर फिदायीन हमला — 12 की मौत, 27 घायल

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के बाहर हुए भीषण धमाके ने देश को झकझोर दिया है। प्रारम्भिक खबरों के मुताबिक़ इस फिदायीन हमले में 12 लोगों की मौत हुई है और 27 अन्य घायल हैं। सुरक्षा बलों और रेस्क्यू टीमों ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है जबकि खराब हालत वाले कुछ घायलों का इलाज चल रहा है।

घटना के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना के वरिष्ठ नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस धमाके को देश के लिए एक स्पष्ट “वेक अप कॉल” करार देते हुए कहा कि फिलहाल पाकिस्तान युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है। उनके अनुसार यह हमला केवल एकल घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के खिलाफ चल रहे हिंसक अभियान का हिस्सा है। ख्वाजा आसिफ ने कहा, “जो कोई भी यह सोचता है कि हमारी सेना सीमांत क्षेत्रों में यह जंग अकेले लड़ रही है, उसे आज के आत्मघाती हमले को एक चेतावनी के रूप में लेना चाहिए। यह पूरा पाकिस्तान है जो इस च Read more...

क्या खामेनेई के दिन अब गिने-चुने हैं? ईरान में बगावत के मिल रहे हैं 5 बड़े संकेत

ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के दशकों पुराने शासन के खिलाफ जनता का आक्रोश अब केवल छिटपुट विरोध नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित विद्रोह का रूप ले चुका है। पिछले तीन दिनों से तेहरान की गलियों से लेकर मशहद के बाजारों तक "तानाशाह मरेगा" के नारों ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है।

यहाँ उन 5 संकेतों का विस्तृत विश्लेषण है जो बताते हैं कि ईरान में खामेनेई युग के अंत की शुरुआत हो चुकी है:

1. डर के साम्राज्य का पतन: युवाओं का विद्रोह

ईरान की आधी से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है, जो अब इस्लामिक कट्टरपंथ के साये में जीने को तैयार नहीं है। दिसंबर की शुरुआत में किश आइलैंड मैराथन में महिलाओं का बिना हिजाब दौड़ना कोई साधारण घटना नहीं थी; यह सत्ता के 'मोरैलिटी पुलिसिंग' के मुंह पर तमाचा था। जब युवा पीढ़ी जेल और जुर्माने के डर को त्याग देती है, तो समझ लेना चाहिए कि शासन की नैति Read more...

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