पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (PRTC) के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों द्वारा शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर किए गए उग्र प्रदर्शन के बाद पंजाब सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। किलोमीटर स्कीम की बसों का टेंडर रद्द करने के विरोध में चल रही इस हड़ताल पर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए हड़ताल में शामिल सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
विभाग ने इस संबंध में सभी कॉन्ट्रैक्ट मुलाजिमों को ईमेल भेजकर कार्रवाई की सूचना दी है। मेल में स्पष्ट कहा गया है कि कर्मचारियों ने गैरकानूनी धरने में भाग लेकर राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान पहुँचाया है। इसके साथ ही, रूट पर बस न चलाने के एवज में जुर्माना भी लगाया गया है।
लुधियाना में हंगामा और यात्रियों की परेशानी
शुक्रवार सुबह लुधियाना बस स्टैंड पर भारी हंगामा देखने को मिला। पंजाब रोडवेज़, पनबस और पीआरटीसी (PRTC) के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे लगभग तीन घंटे तक बस ऑपरेशन पूरी तरह से बंद रहा और सैकड़ों यात्री मौके पर फंसे रहे।
यह उग्र प्रदर्शन शुक्रवार सुबह कई सीनियर यूनियन नेताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के बाद भड़का। प्रदर्शनकारी मजदूरों ने बस स्टैंड के गेट बंद कर दिए और उन्हें खोलने की कोशिश कर रहे पुलिस अधिकारियों से उनकी झड़प भी हुई। अपनी नाराज़गी दिखाने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी पास की पानी की टंकी पर भी चढ़ गए।
इस आंदोलन से पूरे ज़िले में आवागमन को लेकर भारी दिक्कत हुई। सुबह 5 बजे से बसें सड़कों से नदारद थीं, जिससे दफ्तर जाने वालों, छात्रों और रोज़ाना यात्रा करने वालों को काफी देर तक इंतज़ार करना पड़ा।
किलोमीटर स्कीम के टेंडर का विरोध
यह पूरा आंदोलन किलोमीटर स्कीम के लिए टेंडर खोलने के ख़िलाफ़ किया गया था। इस योजना के टेंडर में कहा गया था कि:
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प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर बसें चला सकते हैं।
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रोडवेज वर्कफ़ोर्स में से सिर्फ़ कंडक्टर को रखा जाएगा, जिससे हज़ारों कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा था।
टेंडर शुक्रवार को खोले जाने थे, जिसके कुछ ही घंटे पहले यूनियन नेताओं को हिरासत में लिया गया। कर्मचारियों की मुख्य मांग थी कि इस स्कीम को रद्द किया जाए और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित (Permanent) किया जाए।
सरकार का कड़ा रुख
सरकार ने कर्मचारियों को सस्पेंड करने का कड़ा फैसला लेकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपनी नीतियों के विरोध में की गई अवैध हड़तालों को बर्दाश्त नहीं करेगी। ईमेल के माध्यम से भेजी गई कार्रवाई की सूचना में आर्थिक नुकसान का हवाला देना यह दर्शाता है कि सरकार कानूनी और आर्थिक दोनों मोर्चों पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। इस बड़े एक्शन के बाद अब देखना होगा कि कर्मचारी यूनियनें आगे क्या कदम उठाती हैं।