बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। IRCTC और लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले की सुनवाई कर रहे विशेष जज विशाल गोंगने की अदालत से केस को किसी अन्य जज की बेंच में ट्रांसफर करने की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राबड़ी देवी की ओर से दायर याचिका में यह मांग की गई थी कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले की सुनवाई किसी दूसरे जज को सौंपी जाए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई अब भी जज विशाल गोंगने की ही अदालत में जारी रहेगी। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब लालू परिवार से जुड़े कई बड़े नेता इस मामले में आरोपों का सामना कर रहे हैं और राजनीतिक गलियारों में इस केस को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
9 जनवरी 2026 को तय होंगे आरोपों पर फैसला
लैंड फॉर जॉब घोटाले से जुड़े CBI के मामले में अब अगली बड़ी तारीख 9 जनवरी 2026 तय की गई है। इसी दिन राऊज एवेन्यू कोर्ट यह फैसला सुनाएगी कि आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे या नहीं। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
CBI ने इस मामले में कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया है। हालांकि, अब तक 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त मानी जा रही है। इसके बावजूद यह केस देश के सबसे चर्चित राजनीतिक घोटालों में से एक बना हुआ है और इसकी सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
लैंड फॉर जॉब घोटाला उस समय का बताया जाता है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। इन जमीनों को कथित तौर पर लालू परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर ट्रांसफर कराया गया। CBI का दावा है कि यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम देने का उदाहरण है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में रेलवे की ग्रुप-डी और अन्य नौकरियों में नियुक्ति के बदले जमीन की डील की गई। कई मामलों में जमीन बाजार कीमत से बेहद कम दाम पर ली गई, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ।
CBI के गंभीर आरोप
CBI ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। एजेंसी के मुताबिक, जमीन की खरीद से जुड़ी ज्यादातर रकम कैश में ली गई थी। केवल कुछ ही सेल डीड में बैंकिंग माध्यम से लेनदेन का जिक्र है, जबकि अधिकतर सौदों में नकद भुगतान किया गया।
CBI ने इस केस में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी से जुड़े प्रावधान) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 11, 12, 13, 8 और 9 के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
राजनीतिक असर और आगे की राह
राऊज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले का राजनीतिक असर भी देखने को मिल रहा है। विपक्षी दल इसे कानून की जीत बता रहे हैं, जबकि RJD और लालू परिवार के समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रहे हैं। हालांकि कोर्ट का कहना है कि याचिका में जज बदलने का कोई ठोस आधार नहीं बताया गया।
अब सभी की नजरें 9 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब कोर्ट यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होंगे या नहीं। इस फैसले से न केवल कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होगी, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।